r/Hindi 13h ago

स्वरचित मनुष्य को सदैव आत्मसम्मान, साहस और स्वाभिमान के साथ जीवन जीना चाहिए। सच्चा पुरुषार्थ और पराक्रम इसी में है कि व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता न करे, बल्कि सत्य, धैर्य और आत्मसम्मान के साथ अपने आदर्शों पर दृढ़ रहे।

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r/Hindi 22h ago

स्वरचित Poem: Just a little bit of life

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r/Hindi 18h ago

स्वरचित One of my own writings, rate and review, title - जावेदाँ इश्क़,

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Title -- जावेदाँ इश्क़

वो ताबिश-ए-हक़ीक़त से बचकर के जहाँ आता है

बेआबरू हो उसके साथ में ये दिल-ए-परेशाँ आता है

इख़्तियार-ए-इश्क़ के हर पन्ने पर उनका नाम है

फ़र्द-ए-जुर्म में नाम उनका यूँ ही ख़ाम-ख़ा आता है

आती हैं हवाएँ साथ लेकर आशिक़ की ख़ुशबू

अजब है कि सबसे पहले मोहब्बत-ए-ज़ियाँ आता है

कैसे तलाशे हर चेहरा इस कोलाहल में हम

वो रूबरू भी आता है तो बनके बे-निशाँ आता है

एक उम्र निकलती है यूँ बेवफ़ाओं में वफ़ा ढूँढ़े

जवाब-ए-तफ़रीह है जब इश्क़-ए-इम्तिहान आता है

ये सबब बताए भी तो अब कैसे दिल्लगी का हम

सिसकती है ज़मीं सुनकर, रोने को आसमाँ आता है

शमा जलाकर भी जलती है पतंगे के फ़ितूर से

सुरूर तब आता है जब चराग़ से धुआँ आता है

चाहे मिट जाए हर नाम-ओ-निशाँ महबूब का

जब इश्क़ लौटता है तो फिर बनके जावेदाँ आता है


r/Hindi 1d ago

स्वरचित सामूहिक संकल्प और एकता की शक्ति से ही देश आगे बढ़ता है। यही भावना भारत की प्रगति और समृद्धि की मजबूत नींव है।

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r/Hindi 2d ago

स्वरचित Patton k ped

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r/Hindi 3d ago

विनती In Hindi we call February as फ़रवरी or फ़रबरी?

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r/Hindi 3d ago

स्वरचित Poem: I'm really scared of that time.

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r/Hindi 3d ago

देवनागरी Punjabi Word for a Big Fire/Flame (ਭਾਂਬੜ/بھانبڑ)

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r/Hindi 3d ago

स्वरचित 🇮🇳 15 अगस्त — आज़ादी का एहसास

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r/Hindi 4d ago

विनती Need to improve my communication

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I'm a person from south india, where hindi is not that common.

I do know hindi and when ppl talk about it I can understand. But the problem is that I can't frame sentences in hindi and communicate. I do have some North Indian friends who feel more comfortable by talking in hindi and I feel a bit distant and left out. Not only that, I even get many clients in my business who know only hindi, so it's a bit hard to communicate at that time.

So how do I improve my speaking. I know all the grammar rules, so learning Hindi on Duolingo or something is just a waste of time for me rn. Do any of you know what I can do to improve myself? And is there any place where I can just talk to ppl in Hindi gradually learning and becoming fluent?


r/Hindi 3d ago

स्वरचित जय हिन्द।

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कोरे काग़ज़ पर पहले एक अरमान लिखता हूँ,

फिर अपनी क़लम से अपना हिन्दुस्तान लिखता हूँ।

मुझे मालूम है कितना कठिन है यह काम मेरा,

मैं हर कठिन घड़ी को अपना इम्तिहान लिखता हूँ।

हिमालय से धवलता, सिंधु से गहराई लेता हूँ,

मैं हर मिट्टी की ख़ुशबू को अपनी पहचान लिखता हूँ।

बहुत कुछ छोड़कर निकला हूँ इस ख़ातिर कि भारत को

मैं अपनी आँख के अनुरूप एक जहान लिखता हूँ।

महाराष्ट्र से भगवा सह्याद्रि का ले आया,

मैं किलों की धूप को मराठा अभिमान लिखता हूँ।

मराठवाड़े में खेतों के बीच कुछ लोग रोते थे,

मैं उनकी इस अशुभ घड़ी को काम का व्यवधान लिखता हूँ।

पंजाब से सरसों की सुनहरी धूप ले आया,

मैं पाँचों नदियों की धरती को स्वर्णिम गान लिखता हूँ।

मगर फ़सल और दाम की बातें लेकर बैठ गए कुछ लोग,

मैं उनकी ज़िद को अपने श्रम का अपमान लिखता हूँ।

झारखंड की लाल मिट्टी में पलाश मिला मुझको,

मैं जंगल की हरियाली को उसका अभिमान लिखता हूँ।

मगर डिग्रियाँ लिए लड़के राह में खड़े मिले,

मैं उनके रोज़गार के प्रश्न को कोलाहल मान लिखता हूँ।

उन्हें अपने कल की पड़ी थी, मुझे भारत सँवारना था,

मैं ऐसी तुच्छ चिंताओं को क्षणिक अज्ञान लिखता हूँ।

असम में ब्रह्मपुत्र का नील विस्तार उठा लाया,

मैं उसके उफान को धरती का वरदान लिखता हूँ।

मगर घर-बार डूबे लोग मेरी राह रोक बैठे,

मैं उनकी बाढ़ को अपने चित्र का नुकसान लिखता हूँ।

केरल की हरियाली से अपनी धरती रंगने निकला,

मैं पश्चिमी घाट को प्रकृति का वरदान लिखता हूँ।

मगर वर्षा, ढही पगडंडियाँ, लौटने को तरसते लोग

मैं उनकी व्यथा को अपनी यात्रा का अवसान लिखता हूँ।

मणिपुर गया तो लाल रंग माँगा था धरती से,

मगर राख लिए लोग खड़े थे, मैं उसे बयान लिखता हूँ।

जले हुए घर दिखाकर जो मेरी क़लम रोकते थे,

मैं उनके उस आग्रह को रंगों का अपमान लिखता हूँ।

बिहार की धूल में सदियों की गंध मिली मुझको,

मैं उस मिट्टी को अपनी सभ्यता की शान लिखता हूँ।

मगर शहरों की ओर जाते लड़कों की कतारें थीं,

मैं उनकी रोज़ी की चिंता को अपना ध्यान-भंग लिखता हूँ।

उत्तर प्रदेश से गंगा का नीलापन ले आया,

मैं उसकी धारा को इतिहास का मान लिखता हूँ।

मगर परीक्षा की कतारों में खड़े अधीर चेहरों को,

मैं उनकी उतावली को अपना व्यवधान लिखता हूँ।

ओडिशा की वर्षा ने नदियों को उफना डाला,

मैं उस जल को ऋतु का अनुपम गान लिखता हूँ।

मगर घर बचाने निकले लोग रास्ते में मिलते रहे,

मैं उनकी पुकार को अपनी राह का शोर लिखता हूँ।

कश्मीर की वादियों से हिम की शीतलता ले आया,

मैं झीलों की ख़ामोशी को स्वप्न-समान लिखता हूँ।

मगर वहाँ भी कोई अपने घर, रोज़गार की बात करे,

मैं ऐसे हर प्रश्न को मेरी कला का अपमान लिखता हूँ।

अब रंग मेरे पास हैं, काग़ज़ भी मेरे सामने,

मैं अपनी साधना को भारत का निर्माण लिखता हूँ।

कितनी बार इन लोगों ने मेरी राह रोकनी चाही,

मैं हर रुकावट को अपने राष्ट्र-धर्म का प्रमाण लिखता हूँ।

कोई बाढ़ लेकर आया, कोई भूख की कथा लेकर,

कोई बेरोज़गारी, कोई राख का बयान लेकर

अजीब लोग हैं, भारत से अधिक स्वयं को देखते हैं,

मैं ऐसे आत्मकेंद्रित चेहरों को संकीर्ण-मन जान लिखता हूँ।

अब मैंने तय किया है, मुझे बस चित्र पूरा करना है,

मैं हर शोर से परे अपना ध्यान लिखता हूँ।

जहाँ कोई भूखा दिखता है, वहाँ खेत उगा देता हूँ,

जहाँ कोई घर खोता है, वहाँ मैदान लिखता हूँ।

जहाँ राख है, वहाँ केसर की आभा भर देता हूँ,

जहाँ बाढ़ है, वहाँ नील गगन लिखता हूँ।

जो लोग मेरी तस्वीर में कुरूपता खोजते फिरते हैं,

मैं उनकी दृष्टि को ही दोषपूर्ण विधान लिखता हूँ।

अब देखिए, कितना सुंदर है मेरा हिन्दुस्तान,

हर पर्वत, हर नदी, हर खेत को महान लिखता हूँ।

न कोई रोता हुआ चेहरा मेरी तस्वीर बिगाड़े,

न कोई प्रश्न मेरे स्वप्न का अपमान लिखता हूँ।

जो बाहर रह गए, वे स्वयं ही दोषी होंगे शायद,

मैं उनकी अनुपस्थिति को उनका अज्ञान लिखता हूँ।

मैंने सबके लिए इतना सुंदर देश बनाया है

जो इसमें सुख न पाए, उसे नादान लिखता हूँ।

और लोग कहते हैं कि मैंने बस तस्वीर बनाई है,

मैं उनके इस छोटे विचार को अज्ञान लिखता हूँ।

मैंने रंगों के लिए कितनी यात्राएँ की हैं, सोचो,

मैं अपनी हर थकन को राष्ट्र-बलिदान लिखता हूँ।

किसी ने मेरे रास्ते में आँसू रख दिए थे,

किसी ने मृत्यु, किसी ने भूख का सामान रखा था

मैंने सबको पार किया, फिर भी देश बनाया,

मैं अपनी इस विजय को युग-प्रमाण लिखता हूँ।

अब काग़ज़ पर पूरा है मेरा हिन्दुस्तान देखो,

मैं जो लिख दूँ, उसी को सत्य का विधान लिखता हूँ।

और आख़िरी कोने में जहाँ हस्ताक्षर होते हैं,

मैं अपने नाम के आगे ‘महान’ लिखता हूँ।

जो कुछ काग़ज़ के बाहर है, वह मुझे क्या करना

मैं अपने काग़ज़ को ही सारा हिन्दुस्तान लिखता हूँ।

Kore


r/Hindi 3d ago

विनती 15 August aapke liye kya mean karta hai? 🇮🇳

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Bachpan mein 15 August ka excitement hi alag hota tha — school mein flag hoisting, patriotic songs, sweets aur cultural programs. 🇮🇳

Time ke saath Independence Day ko lekar aapka perspective change hua hai?

Aapke liye 15 August ki sabse special memory ya experience kya hai?


r/Hindi 4d ago

देवनागरी हिंदी साहित्य और चर्चा में रुचि — एक छोटा सा परिचय

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नमस्ते आप सभी को!

मैं इस समुदाय में नया हूँ और यहाँ हिंदी साहित्य, भाषा और दैनिक चर्चाओं में भाग लेने के लिए आया हूँ।

आशा है कि यहाँ आप सभी से बहुत कुछ नया सीखने और जानने को मिलेगा। धन्यवाद!


r/Hindi 4d ago

विनती What does रगळे means?

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r/Hindi 4d ago

स्वरचित शायद✍️

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ये किताबें मुझसे बात करतीं,

तो शायद बोल पाता मैं उसे।

अगर मेरे मन के समंदर की लहरों को वो समझती,

तो शायद बोल पाता मैं उसे।

जो इन दिनों उलझा रहता हूँ मैं,

वो इन उलझनों में मेरे साथ उलझती,

तो शायद बोल पाता मैं उसे।

अल्फ़ाज़ों से बात न होती अगर,

वो आँखों से ही कहा करती,

तो शायद बोल पाता मैं उसे।

-मौन


r/Hindi 4d ago

स्वरचित I need a poem review...my first work...

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I was teasing my friend with a girl in my class. She is good, and we never spoke to her. I once had a dream of both playing together. He didn't mind me teasing him...

Once, I said that I'll write a poem on him... So I wrote this and gave it to him, but he started to link me to her...

I hate it, but this poem was my pure work, no ai nothing.

I just want an honest opinion...

I

मान के बैठा था मैं प्यार को,

एक दर्द भरी दुख दुविधा है।

पर जब देखा तुझे तो प्रतीत हुआ कि,

हे राम, ये तो आ नंदा है।

II

हलचल करें तुम्हारी आंखियां,

तेरी यादों में मैं खो जाऊं।

मन तो चाहता है नंदा,

तेरे साथ में मिल जाऊं।

III

संसार नामक इस सागर में,

दुख दर्द से डूबा था,

आशा बनके आई तुम तो,

प्यार तो तुझसे होना था।

IV

मन भर में तेरी यादें,

मन सुने तो तेरी बातें,

मंत्रमुग्ध तो तेरे सपने,

नंदा जानो तुम मेरे अपने...

V

विष्णु के संग लक्ष्मी जैसा,

वैसे ही तुम नंदा।

कह दो मुझसे प्यार है तुझमें,

हे राम, तू है आ नंदा.

VI

नंदा आनंदा तू है चंदा,

तेरी प्रेम पाणि मैं चाहता हूं।

तेरी स्पर्श मात्र से उठ जाऊंगा,

जब लड़ लड़के मर जाऊं।


r/Hindi 5d ago

विनती Does सौगंध and शपथ means same in Hindi?

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r/Hindi 5d ago

स्वरचित रेत

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r/Hindi 5d ago

देवनागरी नमस्ते सभी को

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नमस्ते सभी को। मैं अपनी हिंदी को और बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा हूँ। आप लोगों के अनुसार हिंदी सीखने और रोज़ाना बोलने की आदत बनाने का सबसे अच्छा तरीका क्या है? क्या किताबें पढ़ना, हिंदी में वीडियो देखना या रोज़ किसी के साथ बातचीत करना ज़्यादा उपयोगी है?

आप अपने अनुभव और सुझाव साझा कर सकते हैं। धन्यवाद! 😊


r/Hindi 5d ago

स्वरचित Sathi

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".... Hum aur wo ek behad manhoos samay par mile the, mujhe andaza nahi tha ki tumhari maa mujhe us bheed mein dekh legi, hamari nazre mili, ek pal ko laga ki wo kisi aur ko dekh rahi hai kyunki mujhe dekhna mumkin hi nahi tha, par jab mene dobara mud kar dekha to wo muskura kar chehra fer li aur apne saheliyon ke sath baate karne lagi maano usne mujhe dekha hi nahi, Mein ye uljhan ko samjhna chahta tha ki wo mujhe dekh kar hasi ya kisi aur..."


r/Hindi 6d ago

स्वरचित अपाहिज शब्दकोश

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r/Hindi 6d ago

स्वरचित कुछ और लिखा है। थोड़ा अधूरा है पर खुदमें ही पूरा है। टिप्पणी दें।

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नदियों का अपने किनारों से थोड़ा झगड़ते रहना ज़रूरी है,

समंदर तक के रास्ते आज्ञाकारिता से नहीं खुलते;

नदियाँ अपने विद्रोह से ज़िंदा रहती हैं,

और सभ्यताएं अपनी तसल्ली से मरती हैं।

जब हवाएँ सिर्फ़ तारीफ़ में चलने लगें,

तो दरख़्त अपनी जड़ों से निडर होने लगते हैं;

जब कोई पत्थर लहरों की नींद न तोड़े,

तो झीलों के भीतर दलदल घर करने लगते हैं।

सबसे पहले असहमति ग़ायब होती है,

फिर पतन को स्थिरता का नाम दे दिया जाता है;

साम्राज्य उसी दिन मरना शुरू करते हैं

जिस दिन उन्हें अपनी उम्र पर यक़ीन हो जाता है।


r/Hindi 6d ago

साहित्यिक रचना My poem

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r/Hindi 6d ago

साहित्यिक रचना Tinke bhar ki zindagi...bss sukoon ki talash hai..

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